चांद पर मानव भेजने की योजना बना रहे जेफ बेजोस

टेक्नोलॉजी

10 May 2019

चांद पर मानव भेजने की योजना बना रहे अमेजन के CEO जेफ बेजोस, जानिये खास बातें

चांद पर मानव भेजने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। हाल ही में एक इवेंट में अमेजन के CEO जेफ बेजोस और स्पेस के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी ब्लू ऑरिजन ने चांद पर भेजे जाने वाला लैंडर ब्लू मून पेश किया था।

बेजोस ने कहा कि पिछले तीन सालों से इस पर काम जारी था और इसे मनुष्यों को चांद पर ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

आइये, इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

लैंडर

6.5 मीट्रिक टन वजन ले जा पाएगा लैंडर

ब्लू मून लैंडर की खास बात यह होगी कि यह अंतरिक्ष में ऑटोमैटिक नेविगेशन के सहारे चांद की सतह पर आसानी से लैंड कर सकेगा।

यह अपने साथ 6.5 मीट्रिक टन वजन ले जाने में सक्षम है। बेजोस ने कहा कि इसमें नया BE-7 इंजन लगा होगा।

ब्लू ऑरिजन पिछले काफी समय से इस इंजन पर काम कर रही है। जल्द ही इसकी टेस्टिंग शुरू की जाएगी। यह लिक्विड हाइड्रोजन के सहारे काम करेगा।

समयसीमा

साल 2024 तक होगा लैंडर

कुल 6.5 मीट्रिक टन भार ले जाने की क्षमता के चलते ब्लू मून वैज्ञानिक उपकरणों के साथ मनुष्य को भी चांद की सतह पर ले जा पाएगा।

हालांकि, अभी तक इसे तैयार नहीं किया है। दोनों कंपनियों ने इसका एक मॉडल पेश किया है, जिससे यह पता चला है कि यह कैसा दिखेगा।

बेजोस ने बताया कि इसे रोवर, सैटेलाइट और मनुष्य को ले जाने लायक बनाने में 2024 तक का वक्त लगेगा।

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नोटिफाई करें

सैटेलाइट भी लॉन्च कर पाएगा रोवर

लैंडर के साथ-साथ बेजोस ने एक चार पहिये वाला रोवर भी पेश किया। उन्होंने बताया कि यह व्हीकल वैज्ञानिक प्रयोग करने के साथ-साथ छोटे सैटेलाइट भी लॉन्च कर सकेगा।

योजना

चांद पर कॉलोनी बसाने की योजना

बेजोस की योजना चांद पर मनुष्यों की कॉलोनी बसाना है।

उन्होंने कहा कि लैंडर और रोवर धरती से बाहर चांद पर कॉलोनी बसाने की योजना के शुरुआती कदम हैं।

बेजोस ने कहा कि आने वाली पीढ़ियां इसे संभव बनाएगी। उन्होंने कहा कि चांद के दक्षिण ध्रुव पर मिली वाटर आइस की वजह से यह मनुष्य के बसने के लिए अच्छी जगह होगी।

वाटर आइस का इस्तेमाल पानी और रॉकेट के ईंधन बनाने के लिए किया जा सकता है।

इंजन के लिए जरूरी होगी वाटर आइस

इस लैंडर के लिए नया इंजन बनाया जा रहे है, जिसे लिक्विड हाइड्रोजन की जरूरत पड़ेगी। यह चांद पर मौजूद वाटर आइस से आसानी से बनाया जा सकती है। चांद पर मौजूद कम गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से रॉकेट आसानी से उड़ान भर सकेगा।

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