उत्तर प्रदेश के मंत्री अब जेब से भरेंगे टैक्स

राजनीति

14 Sep 2019

योगी के मंत्री अपनी जेब से भरेंगे टैक्स, 40 साल पुराने नियम में हुआ बदलाव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री अपना टैक्स खुद भरेंगे। बीते लगभग चार दशकों से राज्य के मंत्रियों के टैक्स का भुगतान राज्य सरकार के खजाने से किया जाता था।

दरअसल, 1981 में बने उत्तर प्रदेश मंत्री वेतन, भत्ते एवं विविध कानून के तहत मुख्यमंत्री और मंत्रियों को अपना टैक्स नहीं चुकाना पड़ता था।

मीडिया में इसकी खबरें आने के बाद योगी सरकार ने शुक्रवार को इस नियम में बदलाव करने का फैसला किया है।

कानून

वीपी सिंह के कार्यकाल में बना था कानून

मीडिया में खबरें आने के बाद कई नेताओं ने कहा कि उन्हें इस कानून के प्रावधानों की जानकारी नहीं थी।

वीपी सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए यह कानून बनाया गया था। तब से राज्य में 19 मुख्यमंत्री और 1,000 से ज्यादा मंत्री रह चुके हैं।

शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि अब सभी मंत्री अपनी जेब से टैक्स चुकाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर यह फैसला किया गया है।

जरूरत

क्यों बनाया गया था यह कानून?

वीपी सिंह सरकार में सहयोगी रहे कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि 1981 में यह बात महसूस की गई कि अधिकतर मंत्री गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और उनकी आय बेहद कम होती है। इसलिए वो अपनी जेब से टैक्स नहीं चुका सकते।

इसके बाद राज्य सरकार ने यह कानून बनाया था। इसका लाभ उठाने के लिए सभी दलों के नेता आगे रहे।

इनमें मुलायम सिंह यादव से लेकर नारायण दत्त तिवारी तक शामिल हैं।

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कानून

करोड़पति मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने उठाया कानून का लाभ

साल 1981 में गरीब मंत्रियों की मदद के लिए यह कानून बनाया गया था, लेकिन बदले वक्त में करोड़पति मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने इसका लाभ उठाया है।

2012 में राज्यसभा चुनाव के समय मायावती की संपत्ति 111 करोड़ और 2019 के लोकसभा चुनाव के समय अखिलेश यादव की संपत्ति 37 करोड़ रुपये बताई गई थी।

ये दोनों करोड़पति नेता मुख्यमंत्री रहते हुए इस कानून से लाभ लेते रहे। मौजूदा दौर में इस कानून में बदलाव जरूरी था।

बीते वित्त वर्ष चुकाया गया 86 लाख का टैक्स

पिछले वित्त वर्ष योगी सरकार में मंत्रियों के टैक्स के रूप में राज्य के कोष से 86 लाख रुपये चुकाए गए। इस साल भी टैक्स राज्य के खजाने से जाता, लेकिन सरकार ने यह फैसला ले लिया है।

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