चुनाव आयोग ने खारिज की विपक्ष की मांग

राजनीति

22 May 2019

चुनाव आयोग ने खारिज की विपक्ष की मांग, तय नियमों से होगी मतगणना

चुनावी परिणाम आने से पहले विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। चुनाव आयोग ने विपक्ष की पहले VVPAT पर्चियों की गणना और उसके बाद मतगणना करने की मांग को ठुकरा दिया है।

इस मांग को लेकर 22 विपक्षी दलों ने मंगलवार को चुनाव आयोग से मुलाकात की थी।

आयोग ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि परंपरागत तरीके से पहले मतगणना होगी और उसके बाद VVPAT पर्चियों की गणना की जाएगी।

आइये, इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

विपक्ष की मांग

दो मांगों को लेकर चुनाव आयोग से मिले थे विपक्षी दल

मंगलवार को कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों समेत 22 विपक्षी दल चुनाव आयोग से मिले थे।

इन दलों ने आयोग के सामने दो मांगे रखी। पहली मांग थी कि VVPAT पर्चियों की गणना मतगणना से पहले होनी चाहिए।

दूसरी मांग यह थी कि अगर विधानसभा क्षेत्र के चुने गए 5 पोलिंग स्टेशनों में VVPAT और EVM में पड़े वोटों में गड़बड़ी पाई जाती है तो सभी पोलिंग स्टेशनों पर सारी VVPAT पर्चियों का मिलान किया जाए।

याचिका

सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है ऐसी याचिका

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की बेंच 7 मई को 100 प्रतिशत EVM और VVPAT पर्चियों केे मिलान वाली याचिका को खारिज कर चुकी है।

इसके बाद एक बार फिर कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की थी। इसे भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।

इससे पहले अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हर विधानसभा क्षेत्र के किन्हीं पांच बूथ की EVM में पड़े वोट और VVPAT पर्चियों का मिलान किया जाना चाहिए।

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निर्णय

बुधवार को बैठक कर आयोग ने लिया निर्णय

विपक्षी दलों के साथ मुलाकात में चुनाव आयोग ने कहा कि वह इस तीनों आयुक्तों की बैठक के बाद इस पर फैसला लेगा।

आज सुबह हुई बैठक में आयोग ने यह साफ कर दिया कि कल होने वाली मतगणना पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार ही होगी और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

इस बैठक में आयोग के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा भी मौजूद थे।

बता दें, लवासा चुनाव आयोग से नाराज चल रहे हैं।

EVM पर अविश्वास जाहिर कर चुकी है विपक्षी पार्टियां

विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग के सामने कई बार EVM की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा चुकी है। उनका मानना है कि EVM में छेड़छाड़ की जा सकती है। चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को अपना दावा साबित करने की चुनौती दे चुका है।

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