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राजनीति
15 Apr 2019

सबसे अधिक बैंक बैलेंस वाली राजनीतिक पार्टी है बसपा, खातों में जमा हैं 669 करोड़ रुपये

राजनीतिक पार्टियों में बसपा का बैंक बैलेंस सबसे अधिक

अगर आपसे पूछा जाए कि भारत में किस पार्टी का बैंक बैलेंस सबसे ज्यादा है तो आपके दिमाग में कांग्रेस या भारतीय जनता पार्टी का नाम आएगा। लेकिन इस सवाल को जवाब कोई तीसरी ही पार्टी है।

जी हां, मायावती की बहुजन समाज पार्टी का बैंक बैलेंस राजनीतिक पार्टियों में से सबसे अधिक है।

चुनाव आयोग को जमा किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आठ सरकारी बैंक खातों में बसपा के कुल 669 करोड़ रुपये जमा हैं।

प्रसंग

राजनीतिक पार्टियों में बसपा का बैंक बैलेंस सबसे अधिक

समाजवादी पार्टी

सपा दूसरे स्थान पर

बसपा ने चुनाव आयोग के पास अपनी व्यय रिपोर्ट जमा की थी, उसी से यह आंकड़ा सामने आया है।

पार्टी ने अपने बैंक बैलेंस के अलावा 95.54 लाख रुपये नकदी भी दिखाई है।

उत्तर प्रदेश में बसपा की सहयोगी समाजवादी पार्टी इस सूची में दूसरे स्थान पर है।

सपा के बैंक खातों में कुल 471 करोड़ रुपये जमा हैं।

पिछले साल 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद उसकी कुल जमा रकम में 11 करोड़ रुपये की कमी आई है।

कांग्रेस और भाजपा

ये है कांग्रेस और भाजपा का स्थान

कांग्रेस का सूची में तीसरा स्थान है और उसके बैंक खातों में कुल 196 करोड़ रुपये जमा हैं।

वहीं, केंद्र शासित भाजपा के बैंक खातों में कुल 82 करोड़ रुपये जमा हैं और वह सूची में पांचवे स्थान पर है।

देश की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा का इतना कम बैंक बैलेंस होने का एक कारण उसका खर्च है।

पार्टी ने 2017-18 में प्राप्त कुल 1,027 करोड़ रुपयों में से 758 करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे।

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नोटिफाई करें

ADR

पिछले 2 साल में भाजपा की आमदनी सबसे ज्यादा

'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (ADR) के मुताबिक, पिछले दो सालों में भाजपा की आमदनी सारी राजनीतिक पार्टियों में सबसे ज्यादा रही है।

उसे 2016-17 में 1,034 करोड़ तो 2017-18 में कुल 1,027 चंदे के तौर पर प्राप्त हुए।

कांग्रेस की 2016-17 में कुल आमदनी 225 करोड़ रुपये रही, वहीं उससे अगले साल की जानकारी उसने अभी तक चुनाव आयोग को नहीं दी है।

वहीं, इस दौरान बसपा की आमदनी 174 करोड़ रुपये से घटकर 52 करोड़ रुपये पर आ गई।

आय का स्त्रोत न बताने के लिए होती है पार्टियों की आलोचना

राजनीतिक पार्टियों की कुल आमदनी का 87 प्रतिशत हिस्सा चंदे से आता है। आय का स्त्रोत छुपाने और 20,000 रुपये के कम चंदे का हिसाब न देने के लिए राजनीतिक पार्टियों की आलोचना होती है और इसे राजनीति में भ्रष्टाचार का जरिया माना जाता है।

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