मानसून में डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए बरतें सावधानी

लाइफस्टाइल

14 Jun 2019

ग्लोबल वार्मिंग के कारण तेज़ी से फैलेगा डेंगू, इस मानसून सुरक्षित रहने के लिए बरतें सावधानी

डेंगू बुखार, मच्छर जनित वायरल संक्रमण है, जो दुनियाभर के ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों जैसे भारत और ब्राज़ील जैसे देशों में आम है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में डेंगू की वैश्विक घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि हुई है।

हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के साथ ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दुनियाभर में यह वायरल बीमारी तेज़ी से फैल जाएगी।

आइए जानें इस मानसून डेंगू के कारण और सुरक्षित रहने के उपाय।

असर

सदी के अंत तक होगा 600 करोड़ लोगों तक डेंगू का असर

नेचर माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध से पता चला है कि सदी के अंत तक लगभग 600 करोड़ लोगों तक डेंगू का असर होगा।

आने वाले 60 सालों में अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया में यह वायरस फैल सकता है।

लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन और वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि 2080 तक वैश्विक आबादी के लगभग 60% को वायरल संक्रमण से संक्रमित होने का ख़तरा है।

भारत

गंभीर चिंता का कारण है डेंगू

गंभीर चिंता का कारण है डेंगू

भारत में मानसून और उसके कुछ महीनों बाद तक डेंगू बुखार आम है। शहरों में लगातार मच्छरों की संख्या बढ़ रही है, जिससे एकत्रित पानी से बीमारियाँ फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है।

डेंगू के अलावा मलेरिया, फ़ाइलेरिया, जीका और चिकनगुनिया कुछ ऐसी बीमारियाँ हैं, जो कीड़ों की वजह से फैलती हैं।

इस तरह की बीमारियों से ख़ुद सुरक्षित रहना आवश्यक है। इसमें से विशेषरूप से डेंगू गंभीर चिंता का कारण है।

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नोटिफाई करें

हर साल दुनियाभर में 40 करोड़ लोग हो रहे हैं वायरस से संक्रमित

सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल और प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 40 करोड़ लोग हर साल इस वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में इससे बचाव करना बहुत ज़रूरी है।

कारण

किन वजहों से होता है डेंगू बुखार?

डेंगू, मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर जीका, चिकनगुनिया और पीले बुखार फैलाने के लिए भी ज़िम्मेदार है।

डेंगू दक्षिण-पूर्वी एशिया, पश्चिमी प्रशांत, पूर्वी भूमध्यसागरीय, अमेरिका, कैरेबियन और अफ़्रीका के ऊष्णकटिबंधीय एवं उप-ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैला हुआ है।

डेंगू शुरू में एक साधारण फ्लू के रूप में प्रकट होता है, लेकिन अनदेखा करने पर यह घातक हो सकता है। इसलिए समय पर इसका इलाज ज़रूरी है।

डेंगू के लक्षण

डेंगू होने पर अचानक तेज़ बुखार, सिरदर्द, आँखों में दर्द (आमतौर पर आँखों के पीछे), माँसपेशियों या जोड़ों और हड्डियों में दर्द, लाल चकत्ते पड़ना, मतली और उल्टी, असामान्य रक्तस्त्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

चिकित्सा

डेंगू के लिए कब लेनी चाहिए चिकित्सकीय सहायता

डेंगू के लिए कब लेनी चाहिए चिकित्सकीय सहायता

रोग हल्का होने पर पैरासिटामाल, पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों के सेवन से घर पर इसका इलाज संभव है।

वहीं, गंभीर पेट दर्द या उल्टी, नाक या मसूड़ों से ख़ून निकलना, ख़ून की उल्टी या मल में ख़ून, चिड़चिड़ापन, रुखी या ठंडी त्वचा, साँस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

इन लक्षणों के दिखने के बाद भी रोगी को अस्पताल न ले जाने पर उसकी जान को ख़तरा हो सकता है।

डेंगू बुखार का निवारण

हालाँकि, मानव संक्रमण को रोकने के लिए डेंगवाक्सिया वैक्सीन उपलब्ध है। लेकिन यह केवल उन लोगों के लिए है, जो पहले इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। डेंगू का इलाज करने से बेहतर है आप कुछ सावधानिया बरतें।

सावधानी

डेंगू से बचने के लिए बरतें ये सावधानियाँ

मच्छरों को दूर रखने के लिए स्प्रे और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। आरामदायक और पूरे बाजू के कपड़े पहनें, मच्छ्रों को आकर्षित करने वाले सुगंधित लोशन का इस्तेमाल करने से बचें।

इसके साथ ही पानी के कंटेनर को ढककर रखें, लंबे समय तक कहीं पानी जमा न होने दें।

ये मच्छर गंदगी वाली जगह पर अपने अंडे नहीं देते हैं, इसलिए साफ़-सफ़ाई का भी ख़ास ध्यान रखें। ऐसा करके आप डेंगू से बच सकते हैं।

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