जम्मू-कश्मीर में जल्द सामान्य बनाए हालात- सुप्रीम कोर्ट

देश

16 Sep 2019

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- जम्मू-कश्मीर में जल्द सामान्य हालात बनाएं केंद्र, राष्ट्रीय सुरक्षा का रखें ध्यान

विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने कुल आठ याचिकाओं पर सुनवाई की।

CJI रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस अब्दुल नजीर की बेंच ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य में जल्द से जल्द हालात सामान्य बनाए जाएं।

कोर्ट ने कहा कि स्कूलों और अस्पतालों को फिर से खोला जाए। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

सुनवाई

केंद्र से पूछा- फोन और इंटरनेट पर रोक क्यों?

कोर्ट ने केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल से पूछा कि घाटी में इंटरनेट और फोन सेवाओं पर अभी तक रोक क्यों है? कोर्ट ने इसे लेकर दो सप्ताह में जम्मू-कश्मीर की विस्तृत तस्वीर सामने रखने को कहा है।

अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फोन और इंटरनेट पर रोक लगाई गई है।

उन्होंने कहा कि बुरहान वाणी की मौत के बाद तीन महीने तक ये सेवाएं बंद रही थी।

अनुमति

गुलाम नबी आजाद को मिली कश्मीर जाने की अनुमति

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कश्मीर जाने और अपने परिवार से मिलने की इजाजत मांगी थी।

कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें कश्मीर जाने की इजाजत दी और कहा कि वो बारामूला, अनंतनाग, श्रीनगर और जम्मू का दौरा कर सकते हैं।

हालंकि, इस दौरान वह किसी राजनैतिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले पाएंगे और आने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपेंगे।

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नोटिफाई करें

5 अगस्त से नहीं चली गोली- सरकार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 5 अगस्त के बाद से जम्मू-कश्मीर में गोली नहीं चली है और किसी शख्स की जान नहीं गई है। सरकार ने बताया कि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक यहां 41,866 लोग जान गंवा चुके हैं।

सुनवाई

खुद जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट जाउंगा- CJI गोगोई

CJI रंजन गोगोई ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो खुद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट जाएंगे।

दरअसल, बाल अधिकारों के लिए काम करनी वाली कार्यकर्ता एनाक्षी गांगुली ने आरोप लगाए थे कि प्रतिबंधों के चलते छह से 18 साल तक के बच्चों को हाई कोर्ट तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर CJI ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए खुद जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट जाएंगे।

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