जज को भारी पड़ा न्यायापालिका में भ्रष्टाचार पर सवाल

देश

29 Aug 2019

पटना हाई कोर्ट: जज को भारी पड़ा न्यायापालिका में भ्रष्टाचार पर सवाल, सुनवाई से रोका गया

पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ जज राकेश कुमार को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े करना महंगा पड़ गया है।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही ने जस्टिस कुमार को नोटिस थमाते हुए उन्हें जिन मामलों की वह सुनवाई कर रहे थे, उन सभी से हटा दिया है।

जिस मामले में जस्टिस कुमार ने न्यायपालिका पर सवाल उठाए थे, उसमें उनके आदेश को भी मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली 11 सदस्यीय बेंच ने पलट दिया है।

पृष्ठभूमि

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, जस्टिस कुमार ने पूर्व IAS केपी रमैया के खिलाफ भ्रष्‍टाचार के मामले की सुनवाई करते हुए न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर सख्त टिप्पणी की थी।

रमैया को जमानत देने के निचली कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने पूछा कि जब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण देने से इनकार कर दिया तो निचली अदालत ने उन्हें जमानत कैसे दे दी।

भ्रष्टाचार

रमैया पर 5 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप

बता दें कि रिटायर IAS अधिकारी रमैया पर बिहार महादलित विकास मिशन में 5 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार करने का आरोप है।

हाई कोर्ट औऱ सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत की याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने मई में निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था और उन्हें उसी दिन जमानत मिल गई थी।

सतर्कता अदालत के नियमित जज उस दिन छुट्टी पर थे और उनके स्थान पर दूसरे जज ने उन्हें जमानत दी थी।

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हाई कोर्ट पर टिप्पणी

जस्टिस कुमार ने हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ पर भी लगाए आरोप

जस्टिस कुमार ने इन सभी परिस्थितियों पर सवाल खड़े करते हुए पटना के जिला जज को ये जांच करने का आदेश दिया था कि नियमित जज किसी असल कारण के कारण छुट्टी पर थे या रमैया के आत्मसमर्पण की बात पता होने के कारण उन्होंने जानबूझ कर छुट्टी ली।

जस्टिस कुमार ने हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ पर भी आरोप लगाते हुए कहा था कि उसने निचली अदालत के जजों के खिलाफ आए मामलों पर नरम रुख अपनाया है।

आदेश

प्रधानमंत्री कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजी गईं आदेश की प्रतिलिपियां

जस्टिस कुमार ने कहा था कि उनके विरोध के बाद भी गंभीर आरोपों को सामना कर रहे एक जज को नजीर वाली सजा देने की बजाय मामूली सी सजा देकर छोड़ दिया गया है।

उन्‍होंने कहा कि देश के करदाताओं का करोड़ों रुपया इन्‍हीं जजों के घरों को सजाने पर खर्च किया जाता है।

जस्टिस कुमार ने अपने आदेश की प्रतिलिपियां भारतीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और कानून मंत्रालय के पास भेजी थीं।

11 सदस्यीय बेंच ने रद्द किया जस्टिस कुमार का आदेश

अब गुरुवार को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शाही की अध्यक्षता वाली 11 सदस्यीय बेंच ने उनके इस आदेश को रद्द कर दिया है। बेंच ने कहा कि एक सदस्यीय बेंच को बंद हो चुके मामले पर ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है।

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रंजन गोगोई

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)

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