कश्मीर में आधार कार्ड नामांकन तेज करेगी सरकार

देश

27 Aug 2019

जम्मू-कश्मीर: आधार कार्ड नामांकन की प्रक्रिया तेज करेगी सरकार, सभी को योजनाओं का लाभ देना लक्ष्य

केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर खासकर कश्मीर में आधार कार्ड के नामांकन की प्रक्रिया को तेज करने की योजना बना रही है।

ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद है कि समाजिक कल्याण की योजनाओं का लाभ सभी लोगों को मिल सके।

बता दें कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है।

'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, ये प्रक्रिया 31 अक्टूबर को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, में बंटने के बाद शुरू होगी।

बयान

जम्मू-कश्मीर में 78 प्रतिशत लोगों के पास आधार कार्ड

रिपोर्ट में एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया है, "आधार कार्ड सब्सिडी देने और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने का एक सफल माध्यम है। सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आधार इसे पूरा करने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"

उन्होंने कहा कि वैसे तो हालांकि जम्मू-कश्मीर में 78 प्रतिशत लोगों के पास आधार कार्ड है, लेकिन कुछ इलाकों तक यह अभी भी नहीं पहुंचा है।

योजना

पंचायत स्तर पर सेवा केंद्र के जरिए पहनाया जाएगा योजना को अमलीजामा

वहीं, एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि राज्य में आधार कार्ड पहले से बन रहे है, लेकिन कश्मीर में ये प्रक्रिया बेहद धीमी है और यहां कुछ इलाकों में इसकी नामांकन प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

सरकार अपनी इस योजना को अमलीजामा पहुंचाने के लिए पंचायत स्तर पर सामान्य सेवा केंद्र (CSC) बनाएगी।

अधिकारियों को उम्मीद है कि 31 अक्टूबर के बाद एक हफ्ते के अंदर इस प्रक्रिया को पूरे जम्मू-कश्मीर में शुरू कर दिया जाएगा।

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नोटिफाई करें

उज्ज्वला जैसी योजनाओं का लाभ हर घर पहुंचाना लक्ष्य

अधिकारियों ने बताया कि इस तैयारी के पीछे केंद्र सरकार की योजना उज्ज्वला योजना जैसी सुविधाओं का लाभ कश्मीर के हर परिवार तक पहुंचाने की है। इस योजना में गरीब परिवारों को फ्री LPG गैस कनेक्शन दिया जाता है।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन

31 अक्टूबर को दो हिस्सों में बंट जाएगा जम्मू-कश्मीर राज्य

बता दें कि 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 में बदलाव करके जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था।

तब जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने वाला बिल भी संसद में पेश किया गया था।

ये बिल संसद से पास होने में कामयाब रहा और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद इसने कानून का रूप ले लिया।

ये 31 अक्टूबर से लागू होगा और तब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन जाएंगे।

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