जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों के विरोध में IAS का इस्तीफा

देश

25 Aug 2019

जम्मू-कश्मीर में 'मौलिक अधिकारों के हनन' के विरोध में IAS अधिकारी ने दिया इस्तीफा

केरल के रहने वाले एक IAS अधिकारी ने कश्मीर में मूल अधिकारों के हनन और पाबंदियों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

33 वर्षीय कन्नन गोपीनाथन का कहना है कि मामले में कोई प्रतिक्रिया न देना उन्हें पीड़ा दे रहा था।

वह दादर और नागर हवेली में कई अहम विभागों के मुख्य सचिव के तौर पर काम कर रहे थे और सरकारी बिजली वितरण कंपनी को घाटे से मुनाफे में पहुंचाने में उनका अहम योगदान था।

बयान

गोपीनाथन ने कहा, इंसान को अपनी आत्मा को भी जवाब देना होता है

गोपीनाथन ने NDTV से कहा, "ऐसा नहीं कि मेरे इस्तीफे से कोई फर्क पड़ेगा। लेकिन इंसान को अपनी आत्मा को भी जवाब देना होता है।"

उन्होंने आगे कहा, "कश्मीर में 20 दिनों से लाखों लोगों के मूल अधिकार निलंबित हैं और भारत में कई लोगों को ये ठीक लग रहा है। ये भारत में 2019 में हो रहा है। अनुच्छेद 370 को हटाना मुद्दा नहीं है, बल्कि नागरिकों को इस पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार न देना असली मुद्दा है।"

सवाल

शाह फैसल को हिरासत में लिए जाने पर गोपीनाथन ने उठाए सवाल

गोपीनाथन ने कहा कि कश्मीर के लोग फैसले का स्वागत कर सकते हैं या इसका विरोध कर सकते हैं, ये उनका अधिकार है।

उन्होंने कहा, "जब एक पूर्व IAS अधिकारी (शाह फैसल) को एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया, तब भी सिविल सोसाइटी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ऐसा लगता है कि देश में ज्यादातर लोगों को इससे कोई दिक्कत नहीं है।" 7 साल से IAS अधिकारी गोपीनाथन ने इन्हें मुद्दों पर 21 अगस्त को इस्तीफा दे दिया।

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नोटिफाई करें

इंटरव्यू

गोपीनाथन ने कहा, IAS बनकर खुद अपनी आवाज खो बैठा

वहीं, मलयालम इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में गोपीनाथन ने कहा है, "जब कोई पूछेगा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने एक पूरे राज्य पर बैन लगा दिया, लोगों के मौलिक अधिकार भी छीन लिए, तब आप क्या कर रहे थे। मैं कह सकूंगा कि मैंने विरोध में नौकरी से इस्तीफा दिया था।"

उन्होंने कहा कि उन्होंने लोगों की आवाज बनने के लिए सिविल सर्विसेज जॉइन की थी, लेकिन यहां तो वह खुद अपनी ही आवाज खो बैठे।

चर्चा

गुमनाम रहकर बाढ़ राहत कार्यों में हिस्सा ले चुके हैं गोपीनाथन

गोपीनाथन का नाम सबसे पहले अगस्त 2018 में चर्चा में आया था, जब वह बिना बताए बाढ़ से जूझ रहे अपने गृह राज्य पहुंच गए थे और गुमनाम रहकर राहत और बचाव कार्य में हिस्सा लिया।

लेकिन इस दौरान एक जिलाधिकारी ने उन्हें पहचान लिया और उनका भेद खुल गया।

बाढ़ पीड़ितों की इस तरीके से मदद करने के लिए लोगों ने उनकी जमकर तारीफ की थी।

हालांकि उन्हें कारण बताओ नोटिस भी मिला था।

गोपीचंद को किया था ट्रेनिंग सेंटर खोलने के लिए प्रोत्साहित

अरुणाचल प्रदेश, गोवा, म‍िजोरम और केंद्र शासित प्रदेश काडर के 2012 बैच के IAS रहे गोपीनाथन ने मिजोरम में कलेक्टर रहते हुए प्रसिद्ध बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद को बच्चों की ट्रेनिंग के लिए 30 जमीनी स्तर के बैडमिंटन केंद्र खोलने के लिए प्रोत्साहित किया था।

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