लड़के ने राष्ट्रपति से मांगी जीवन खत्म करने की अनुमति

देश

17 Jul 2019

माता-पिता के झगड़े से परेशान 15 वर्षीय लड़के ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु की अनुमति

बिहार के एक 15 वर्षीय लड़के ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर अपना जीवन खत्म की अनुमित मांगी है।

लड़का अपने माता-पिता के बीच होने वाले रोज-रोज के झगड़ों से परेशान है और इससे उसकी पढ़ाई पर असर पड़ता है।

पत्र की जानकारी मिलने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन को मामले में जांच करने और जरूरी कदम उठाने को कहा है।

पूरा मामला क्या है, आइए आपको बताते हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

पिता के साथ झारखंड में रहता है लड़का

15 वर्षीय ये लड़का मूल रूप से बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव का रहने वाला है। यहां उसके दादाजी नौकरी करते थे।

इसके बाद वह झारखंड के देवघर शिफ्ट हो गया, जहां उसके पिता राज्य ग्रामीण विकास विभाग में मैनेजर के तौर पर काम करते हैं।

लड़का अभी यही से पढ़ाई कर रहा है।

वहीं, उसकी मां पटना के एक बैंक में सहायक मैनेजर के तौर पर काम करती हैं।

आरोप

मां के इशारे पर किया जा रहा कैंसर से जूझ रहे पिता को परेशान

लड़के ने 2 महीने पहले राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपना जीवन खत्म करने की अनुमति मांगी थी।

अपने पत्र में उसने अपने माता-पिता के बीच होने वाले बुरे झगड़ों पर खीज व्यक्त की थी।

रोज-रोज के इस झगड़े से उसकी पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ रहा था।

अपने पत्र में उसने ये भी आरोप लगाया कि उसकी मां के इशारे पर कुछ असामाजिक तत्व कैंसर से जूझ रहे उसके पिता को धमका रहे हैं।

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जांच

विवाहेत्तर संबंधों के लिए एक-दूसरे पर मुकदमा कर चुके हैं माता-पिता

राष्ट्रपति भवन से इस पत्र को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सौंपा गया, जिसने इस पर कार्रवाई की है।

PMO ने भागलपुर जिले के अधिकारियों को मामले में जांच करके आवश्यक कदम उठाने को कहा है।

जिला प्रशासन अधिकारियों के अनुसार, लड़के के दादा और चाचाओं ने तनावपूर्ण संबंध के लिए उसकी मां को जिम्मेदार ठहराया है।

उन्होंने ये भी बताया कि दोनों ने एक-दूसरे पर विवाहेत्तर संबंध का आरोप लगाते हुए मामला भी दर्ज कराया था।

इच्छामृत्यु

इच्छामृत्यु पर कानून क्या कहता है?

बता दें कि भारत में केवल लाइलाज बीमारी के मामलों में ही इच्छामृत्यु की मांग की जा सकती है और इसके लिए भी बेहद कड़े प्रावधान हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 9 मार्च 2018 को अपने ऐतिहासिक फैसले में गरिमा के साथ मरने को मौलिक अधिकार करार दिया था और कहा था कि कोमा जैसी बीमारियों की स्थिति में अगर मरीज के सही होने की संभावना नहीं है, तो चिकित्सा उपचार को रोक कर उसे इच्छामृत्यु दी जा सकती है।

सामान्य हालत में लिखा गया इच्छापत्र अनिवार्य

इच्छामृत्यु के लिए उस व्यक्ति का "इच्छापत्र" अनिवार्य है, जो उसने बीमारी के बीच नहीं बल्कि सामान्य स्वास्थ्य और मानसिक हालत में लिखा हो। इसमें लिखा होना चाहिए कि कोमा में जाने की स्थिति में उसे जीवनरक्षक मेडिकल सुविआएं न दी जाएं।

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