बाँस के खंभे को पकड़कर समुद्र में जीवित रहा व्यक्ति

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16 Jul 2019

समुद्र में केवल एक बाँस के सहारे पाँच दिनों तक जीवित रहा व्यक्ति, जानें पूरी घटना

मछली पकड़ने वाले कई बार तूफ़ान आने की वजह से समुद्र में फँस जाते हैं।

ऐसे ही मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर के मालिक रवींद्रनाथ दास पाँच दिनों तक समुद्र में फँसे रहे और एक बाँस के खंभे को पकड़कर बंगाल की अशांत खाड़ी में बिना भोजन और लाइफ़ जैकेट के जीवित रहे।

आख़िरकार उन्हें चिटगोंग तट पर एक बांग्लादेशी जहाज़ द्वारा बचाया गया। बचाए जाने के बाद उन्हें उपचार के लिए कोलकाता ले जाया गया।

आइए पूरी घटना जानें।

तूफ़ान की वजह से 6 जुलाई को पानी में डूब गया ट्रॉलर

बता दें कि प्रकृति से लड़ते हुए दास पानी में पाँच दिनों तक जीवित रहे। 6 जुलाई को तूफ़ान की वजह से उनका ट्रॉलर पानी में डूब गया। अंततः उन्हें 10 जुलाई को MV Jawad नामक जहाज़ के क्रू द्वारा बचा लिया गया।

आपदा

ट्रॉलर के साथ डूब गए तीन मछुवारे

ट्रॉलर के साथ डूब गए तीन मछुवारे

दास, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप के नारायणपुर के रहने वाले हैं। वो FB नयन-I नाम के एक ट्रॉलर के मालिक हैं।

उन्होंने ट्रॉलर को 14 मछुवारों के साथ 4 जुलाई को गहरे समुद्र में उतारने की तैयारी की।

समुद्र में जब उनका ट्रॉलर डूबा, तो तीन मछुवारे उसमें फँस गए, जबकि दास और अन्य 11 लोग समुद्र में कूद गए। उन्होंने ईंधन के ड्रमों को उतारकर बाँस के खंभे और रस्सी से बाँध दिया।

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बचाव

दास के सभी सहयोगी एक के बाद एक करके समुद्र में डूब गए

इस भयानक आपदा में उनके सभी 11 सहयोगी कुछ ही दिनों में एक के बाद एक समुद्र में डूब गए।

वहीं, दास ने समुद्र में तैरते रहने के लिए अविश्वसनीय धैर्य का प्रदर्शन किया। अंत में उन्हें 10 जुलाई को चिटगोंग के पास एक बांग्लादेशी जहाज़ द्वारा देखा गया।

दो घंटे के अथक प्रयास के बाद उन्हें आख़िरकार बचा लिया गया। हालाँकि, बचाव के दौरान जहाज़ ने उन्हें एक बार खो भी दिया था।

बयान

दास ने दिया अभूतपूर्व साहस का परिचय

दास ने दिया अभूतपूर्व साहस का परिचय

कोलकाता पहुँचने के एक दिन बाद दास ने बताया, "अभी मैं केवल इतना ही याद कर पा रहा हूँ कि मेरा ट्रॉलर समुद्र में डूब गया और हम सभी पानी में कूद गए एवं तैर रहे थे।"

उन्होंने आगे बताया, "जब मैं समुद्र में तैर रहा था, उस दौरान मैंने खाना नहीं खाया। रुक-रुक कर बारिश और बड़ी-बड़ी लहरें चल रही थी। प्यास लगने पर बारिश का पानी भी पिया।"

मुश्किल परिस्थिति में दास ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया।

हादसा

बचाए जाने से कुछ घंटे पहले डूब गया दास का भतीजा

जहाँ एक तरफ़ दास को बचाए जानें की ख़ुशी है, वहीं उन्हें अपने भतीजे को बचाए जानें से कुछ समय पहले डूबने का गम भी है।

दास ने कहा, "हम एक साथ ही तैर रहे थे। उसके पास एक लाइफ़ जैकेट थी, लेकिन वो इस घटना से बहुत ज़्यादा डर गया था।"

उन्होंने आगे बताया "मैंने अपने भतीजे को कई दिनों तक कंधे पर उठाए भी रखा, लेकिन जहाज़ द्वारा बचाए जाने से कुछ घंटे पहले ही वह डूब गया।"

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