मैदानी इलाकों में गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

देश

12 Jun 2019

मैदानी इलाकों में गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, राहत पाने ठंडे इलाकों में जा रहे लोग

मंगलवार को देश का लगभग दो तिहाई हिस्सा गर्मी की चपेट में रहा। बर्दाश्त से बाहर हो रही गर्मी के चलते उत्तर प्रदेश के झांसी में चार रेल यात्रियों की मौत हो गई थी।

गर्मी के कारण कई जिलों में पानी की भयंकर समस्या हो गई है।

उत्तर प्रदेश के झांसी, राजस्थान के बीकानेर और चुरू, हरियाणा के हिसार और भिवानी, पंजाब के पटियाला और मध्य प्रदेश के ग्वालियर और भोपाल में पारा 45 डिग्री से पार हो गया था।

चक्रवाती तूफान

राहत में खलल डालेगा 'वायु'

दिल्ली में मंगलवार सुबह हुई हल्की बारिश के बाद भी तापमान 45 डिग्री से पार था।

सोमवार को अपने इतिहास में सबसे गर्म रही दिल्ली में मंगलवार को तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस रहा।

विषेषज्ञों का मानना है कि गुजरात तट की तरफ बढ़ रहे चक्रवाती तूफान 'वायु' की वजह से मानसून से भी अभी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

देश पिछले तीन दशक में सबसे लंबी हीटवेव का सामना कर रहा है।

हीटवेव

इतिहास में सबसे लंबी हीटवेव

इतिहास में सबसे लंबी हीटवेव

इस साल 32 दिनों से हीटवेट चल रही है। अगर अगले दो दिनों में हीटवेट नहीं थमती है तो यह इतिहास की सबसे लंबी हीटवेट होगी।

इससे पहले 1988 में 33 दिन और 2016 में 32 दिनों तक हीटवेव चली थी।

जब पहाड़ी इलाकों में तापमान 30 डिग्री, तटीय इलाकों में 37 डिग्री और मैदानी इलाकों में 40 डिग्री से पार पहुंच जाता तो इसे हीटवेव माना जाता है। इस साल हीटवेट 2016 का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है।

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असर

मौसम पर पड़ रहा यह असर

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रोपिकल मेट्रोलॉजी (IIMT) पुणे के मुताबिक, लंबे समय तक रहने वाली हीटवेट की वजह से गर्म दिनों और रातों की संख्या में बढोतरी होती है।

1970 से 2015 के बीच न्यूनतम और अधिकतम तापमान को लेकर किए गए अध्ययन में पता चला है कि इस दौरान गर्म दिनों और रातों में बढोतरी हुई है जबकि ठंडे दिन और ठंडी रातों की संख्या तेजी से कम हुई है।

इस साल इस वजह से बढ़ी गर्मी

मौसम विभाग के मुताबिक, प्री-मानसून न होने और सूखे पश्चिमी क्षेत्र से आने वाली गर्म और सूखी हवओं के कारण गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है। हालांकि, इस सप्ताह के अंत तक इससे कुछ राहत मिल सकती है।

पर्यटन

पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों की संख्या बढ़ी

चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए लोग पहाड़ी इलाकों की तरफ रुख कर रहे हैं।

उत्तराखंड के नैनीताल में रोजाना 15,000-20,000 पर्यटक पहुंच रहे हैं, जबकि मसूरी में मई से लेकर अब तक 1.90 लाख से ज्यादा पर्यटक जा चुके हैं।

ऐसा ही हाल शिमला और मनाली का है। माना जा रहा है कि इस महीने इन दोनों शहरों में लगभग 60,000 पर्यटक पहुंचे हैं। इस वजह से पहाड़ी रास्तों पर जाम भी लगा है।

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