फेनी के बाद अब 'वायु' चक्रवाती तूफान का खतरा

देश

11 Jun 2019

फेनी के बाद अब 'वायु' का खतरा, चक्रवाती तूफान को लेकर रेड अलर्ट जारी

चक्रवाती तूफान वायु 13 जून को गुजरात के तटीय इलाकों से टकराएगा और इसे लेकर मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है।

चक्रवात से पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में तटीय फसलों और कच्चे मकानों को बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

इस बीच मौसम विभाग ने इलाके में मछली पकड़ने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का सुझाव दिया है।

चक्रवात के दौरान हवा की रफ्तार 135 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है।

जानकारी

कल रात चक्रवाती तूफान में बदला 'वायु'

अभी पूर्व-केंद्रीय अरब सागर में मौजूद वायु कल रात चक्रवाती तूफान में बदल गया।

अगले 24 घंटों में इसके और तेज होने और गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की पूरी संभावना है।

मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार, चक्रवात के दौरान हवा की रफ्तार 110-120 किमी प्रति घंटा होगी। 13 जून की सुबह हवा की रफ्तार 135 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

अलर्ट में लहरों के आधा मीटर अधिक ऊंची रहने की बात भी कही गई है।

अलर्ट

हो सकते हैं ये नुकसान

चक्रवात से गुजरात के पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में सबसे अधिक नुकसान की आशंका है।

अलर्ट के अनुसार, घरों की छतें उड़ सकती हैं और बिना बंधी धातु की चादरें उड़ सकती हैं। बिजली और संचार माध्यमों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।

वहीं, कच्चे मकानों, झोपड़ियों, कच्ची सड़कों और तटीय फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका है।

विभाग ने लोगों को घर के अंदर रहने को कहा है।

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नोटिफाई करें

मछुआरे

कई राज्यों के मछुआरों को भी किया गया अलर्ट

मौसम विभाग ने अन्य राज्यों में भी वायु चक्रवात को लेकर अलर्ट जारी किया है।

कोंकण और गोवा में 11-13 जून को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, वहीं गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में 12-13 जून को भारी बारिश का अलर्ट है।

वहीं, अरब सागर से सटे राज्यों, केरल, कर्नाटक, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र और गुजरात, के मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए समुद्र में न जाने को कहा है।

चक्रवात फेनी

मई में फेनी ने मचाई थी तबाही

मई की शुरुआत में भारत के पूर्वी तटीय राज्यों में भी चक्रवाती तूफान फेनी आया था। फेनी वायु से ज्यादा खतरनाक था।

इसका मुख्य असर ओडिशा में देखने को मिला था और करोड़ो रुपये की संपत्ति का नुकसान होने के अलावा 34 लोगों की मौत हो गई थी।

हालांकि ये आंकड़े बहुत ज्यादा हो सकते थे, अगर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व में ओडिशा सरकार ने शानदार कार्य करते हुए 12 लाख लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर न पहुंचाया होता।

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