मुंबई की इस लड़की ने भिखारियों को बनाया प्रोफ़ेशनल गायक

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20 May 2019

मुंबई: 27 वर्षीय लड़की ने भिखारियों को बनाया गायक, एक शो के मिलते हैं 35,000 रुपये

हर व्यक्ति की एक ख़ासियत होती है। कुछ लोग अपनी इस ख़ासियत को दुनिया के सामने लाते हैं, कुछ गुमनामी में खो जाते हैं।

वहीं, दुनिया में कई ऐसे लोग भी हैं, जो लोगों की ख़ासियत को पहचानकर उसे एक मुकाम तक पहुँचाने में मदद करते हैं।

यह कहानी एक ऐसी ही लड़की की है, जिसने कुछ भिखारियों की ख़ासियत को पहचानकर उन्हें आज प्रोफ़ेशनल गायक बना दिया है।

उन्हें आज एक संगीत शो के 35,000 रुपये तक मिलते हैं।

शुरुआत

ट्रेन में और स्टेशन पर मिले कई तरह के गायक

हम जिस लड़की की बात कर रहे हैं, वो हैं 27 वर्षीया हेमलता तिवारी।

आपको बता दें हेमलता लगभग पाँच महीने मुंबई में रहीं और लोकल ट्रेनों में यात्रा की। उसी समय उन्हें ट्रेनों और स्टेशनों पर कई तरह के गाने वाले मिले। वो गाना गाकर भीख माँगते थे।

जब हेमलता ने उनका गाना सुना तो वह एकदम हैरान हो गईं, क्योंकि वो किसी गायक की तरह सही सुर-ताल के साथ गा रहे थे।

हेमलता ने किया एक संगठन का निर्माण

इसके बाद क्या था, हेमलता उनके लिए कुछ बेहतर करने के बारे में विचार करने लगीं। उन्होंने भीख माँगने वालों के जीवन में बदलाव लाने के बारे में ठान लिया और एक संगठन का निर्माण किया।

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स्वागत

ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों का गाकर कर रहे थे स्वागत

ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों का गाकर कर रहे थे स्वागत

नौ साल पहले की बात है, जब हेमलता एक दिन लोकल ट्रेन में सवार हुईं और एक स्टेशन पर उतरीं। वहाँ उन्होंने दो ऐसे लोगों को देखा, जो यात्रियों का गाना गाकर स्वागत कर रहे थे।

उनका गाना इतना अच्छा था कि हेमलता उसमें डूब गईं और सुनती रहीं।

इसके बाद वो एक कार्यक्रम में चली गईं। वहाँ उन्होंने बड़े कलाकारों को देखा, जो लोगों से घिरे हुए थे। उस समय उन्हें स्टेशन वाले दोनों गायकों की याद आ गई।

2012 में की स्वराधार की स्थापना

अब हेमलता ने ठान लिया कि चाहे जो भी हो जाए वो स्टेशन पर दिखे गायकों और उनके जैसे लोगों को गाने के लिए बड़ा मंच प्रदान करवाएँगी। इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने 2012 में स्वराधार (Swaradhar) की स्थापना की।

काम

क्या करता है स्वराधार?

स्वराधार की स्थापना का मकसद उन कलाकारों को मंच प्रदान करना है, जो भीख माँगते हैं।

हेमलता कहती है, "हम उन कलाकारों को प्रशिक्षण देते हैं, जो हमसे जुड़ते हैं। उनकी कला के अलावा हम उन्हें तैयार भी करते हैं, ताकि वो मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।"

हेमलता की इस पहल से समाज के उपेक्षित लोगों को समाज में सम्मान मिला है। इसके अलावा उनकी इस कोशिश से पहले भिखारी कहे जाने वालों को अब कलाकार कहा जाता है।

स्वराधार के प्रभाव से हुआ ये बदलाव

हेमलता ने कहा, "ईमानदारी से कहूँ तो जब हमने शुरुआत की थी, तब हम घर-घर जाकर कलाकारों से अपने साथ जुड़ने का अनुरोध करते थे। उनमें से ज़्यादातर इनकार कर देते थे, लेकिन आज हमारे साथ 500 से ज़्यादा कलाकार जुड़े हैं।"

संगीत

संगीत ने प्रदान की गरिमा

संगीत ने प्रदान की गरिमा

36 साल के नेत्रहीन कलाकार चेतन पाटिल कुछ समय पहले तक अपना जीवन ख़त्म करना चाहते थे, लेकिन संगठन ने उनका जीवन बदल दिया।

नेत्रहीन होने की वजह से चेतन को उनके परिवार वालों ने घर से निकाल दिया। उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं थी। स्टेशन पर रहने की वजह से रेलवे पुलिस ने उन्हें ख़ूब पीटा भी था।

अब वो संगठन के साथ जुड़कर काम करते हैं और उनकी वजह से कई स्पॉन्सर भी आते हैं।

कमाई

कैसे और कितनी होती है कमाई

अगर इन कलाकारों के कमाई की बात करें तो तीन कलाकारों और संगीत सेटअप को मिलाकर एक साधारण कार्यक्रम की कमाई 35,000 रुपये से 45,000 रुपये तक होती है। इन पैसों को बाद में कलाकारों में बाँट दिया जाता है।

इस काम में संगठन की मदद कुछ CSR साझेदार भी करते हैं।

संगठन ग्राहकों के हिसाब से उन्हें तरह-तरह के संगीत के पैकेज भी प्रदान करता है, जिसकी कीमत अलग-अलग होती है।

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