राफेल सौदे से पहले फ्रांस गए थे अनिल अंबानी

देश

12 Feb 2019

राफेल सौदे से 15 दिन पहले फ्रांस के रक्षा अधिकारियों से मिले थे अनिल अंबानी: रिपोर्ट

राफेल विमान सौदे पर रोज हो रहे खुलासों के बीच अब अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने एक नया खुलासा किया है।

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सौदे की आधिकारिक घोषणा होने से लगभग 15 दिन पहले अनिल अंबानी फ्रांस के रक्षा मंत्री के दफ्तर गए थे और उनके शीर्ष सलाहकारों से मुलाकात की थी।

रिपोर्ट के बाद विपक्ष के सरकार पर अधिक हमलावर होने की संभावना है।

आज संसद में राफेल सौदे पर CAG की रिपोर्ट भी पेश होनी है।

बैठक

बेहद गुप्त थी मुलाकात

मार्च 2015 के चौथे हफ्ते में हुई इस बैठक में फ्रांस के रक्षा मंत्री जीन वेस ली ड्रायन के विशेष सलाहकार जीन क्लॉड मैलेट, उनके उद्योग सलाहकार क्रिस्टोफी सोलोमॉन और उद्योग मामलों के तकनीकी सलाहकार ज्योफी बुक्रेट भी थे।

सोलोमॉन ने एक यूरोपीय रक्षा कंपनी के शीर्ष अधिकारी को अनिल अंबानी के साथ हुई इस बैठक को बेहद गुप्त बताया था और कहा था कि इसकी योजना बहुत ही कम समय में बनी थी।

अनिल अंबानी

अनिल अंबानी ने किया था राफेल समझौते का जिक्र

अनिल अंबानी ने किया था राफेल समझौते का जिक्र

बैठक से संबंधित एक अधिकारी के अनुसार, अनिल अंबानी ने बैठक में एयरबस हेलीकॉप्टर के साथ व्यापारिक और रक्षा हेलीकॉप्टर, दोनों क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई थी।

इस दौरान अनिल ने एक समझौते (MoU) का भी जिक्र किया था, जो उस समय तैयार हो रहा था और जिस पर बाद में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के समय हस्ताक्षर होने थे।

अनिल की इस बैठक से पहले ही मोदी के 9-11 अप्रैल के फ्रांस दौरे की जानकारी सार्वजनिक थी।

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नोटिफाई करें

प्रधानमंत्री मोदी

मोदी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे अनिल अंबानी

रोचक बात ये है कि जिस हफ्ते यह बैठक हुए, उसी हफ्ते 28 मार्च, 2015 को अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस का गठन हुआ था।

बता दें कि अनिल अंबानी दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

इस दौरान मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने अपने साझा बयान में 36 राफेल विमानों के सौदे का ऐलान किया था।

राफेल सौदे की कुल कीमत 7.78 मिलियन यूरो (करीब 58,000 करोड़ रुपये) है।

दसॉ राफेल

रिलायंस डिफेंस और दसॉ के बीच हुआ है करोड़ों का समझौता

समझौते के तहत होने वाले 30,000 करोड़ के ऑफसेट निवेश में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन की अहम सहयोगी है।

इसमें रिलायंस की कुल हिस्सेदारी पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

इसके अलावा दसॉ और रिलायंस ने एक साझी कंपनी दसॉ रिलायंस एरोस्पेस लिमिटेड भी बनाई है, जिसमें 51 प्रतिशत शेयर रिलायंस का और 49 प्रतिशत दसॉ का है।

साझी कंपनी में रिलायंस और दसॉ 400-400 करोड़ा रुपए का निवेश करेंगी।

राफेल सौदा विवाद

सरकारी कंपनी HAL को हटाकर अनिल अंबानी की कंपनी को किया गया शामिल

राफेल सौदे में सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को हटाकर अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को शामिल किया गया था।

UPA सरकार के समय हुए 108 विमानों के सौदे में HAL दसॉ की सहयोगी कंपनी थी।

मोदी सरकार ने इस सौदे को रद्द कर दिया और 36 विमानों की खरीद का नया सौदा किया जिसमें HAL की जगह रिलायंस डिफेंस शामिल है।

विरोधी अनिल की कंपनी को समझौते में शामिल करने के लिए मोदी पर सवाल उठाते रहे हैं।

राफेल विमान समझौता

'द हिंदु' ने भी राफेल समझौते पर किए थे खुलासे

हाल ही में 'द हिंदु' में भी राफेल से संबंधित कुछ खुलासे हुए थे जिनमें दावा किया गया था कि रक्षा मंत्रालय ने सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय के फ्रांस सरकार के साथ समानांतर बातचीत चलाने पर आपत्ति जाहिर की थी।

एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मोदी सरकार ने सौदे से भ्रष्टाचार संबंधी नियमों को हटा दिया था।

विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी इसे लेकर मोदी पर हमलावर हैं और इसे चुनावी मुद्दा बनाने में लगे हुए हैं।

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