भूपेन हजारिका के परिवार ने नहीं स्वीकार किया भारत रत्न

देश

12 Feb 2019

नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में भूपेन हजारिका का परिवार, भारत रत्न स्वीकार करने से इनकार

दिवंगत गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने उनके पिता को दिया गया 'भारत रत्न' सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

बता दें, गणतंत्र की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने भूपेन हजारिका को मरणोपरांत भारत रत्न देने का ऐलान किया था।

अब उनके बेटे तेज ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में इस सम्मान को लेने से इनकार कर दिया है।

हालांकि, इस फैसले में उनका परिवार एकमत नहीं है।

बयान

'लोकप्रियता का फायदा उठाने का सस्ता तरीका'

अमेरिका में रहने वाले तेज हजारिका ने फेसबुक पर लिखा कि कई पत्रकार उनसे भारत रत्न को स्वीकार करने या नहीं करने के बारे में पूछ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इसे लेकर कोई निमंत्रण नहीं मिला है तो अस्वीकार करने जैसा कुछ नहीं है।

उन्होंने आगे लिखा कि केंद्र सरकार ने भारत रत्न देने में जो जल्दबाजी दिखाई है और समय चुना है वह लोकप्रियता का फायदा उठाने का सस्ता तरीका है।

मतभेद

परिवार में एक राय नहीं

परिवार में एक राय नहीं

तेज हजारिका ने इस मामले में स्पष्ट किया कि वे अपने पिता को दिया गया भारत रत्न तभी स्वीकार करेंगे, जब केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक को वापस लेगी।

हालांकि, तेज के इस फैसले का भूपेन के भाई और भाभी ने विरोध किया है।

भूपेन के भाई समर हजारिका और उनकी पत्नी मनीषा ने कहा कि ये फैसला केवल तेज का है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि भूपेन को यह सम्मान मिलना चाहिए।

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परिचय

कौन थे भूपेन हजारिका

मशहूर गायक, फिल्मकार और संगीतकार भूपेन हजारिका असम के रहने वाले थे। उन्होंने कई भारतीय भाषाओं में गाने गाए थे।

'गांधी टू हिटलर' फिल्म में उन्होंने महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन 'वैष्णव जन' गाया था।

8 सितंबर, 1926 को जन्मे भूपेन को पद्मभूषण और पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया है।

महज 10 साल की उम्र से गायकी शुरू करने वाले भूपेन का 5 नवंबर, 2011 को निधन हो गया। उन्होंने असमिया लोकगीत और संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाई।

विधेयक

आखिर है क्या नागरिकता संशोधन विधेयक

नागरिकता संशोधन बिल, नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए लाया गया है।

कानून बनने के बाद इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को भारत की नागरिकता लेने के लिए 12 साल के बजाय 6 साल ही भारत में गुजारने होंगे।

साथ ही अगर उनके पास उचित दस्तावेज नहीं होंगे तब भी उन्हें नागरिकता दी जा सकेगी।

यह विधेयक अभी राज्यसभा से पास नहीं हुआ है।

विरोध की वजह

क्यों हो रहा है इसका विरोध

असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में इस बिल का विरोध हो रहा है।

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह बिल 1985 के असम समझौते को अमान्य करेगा, जिसके तहत 1971 के बाद असम में आने वाले किसी भी धर्म के विदेशी नागरिक को निर्वासित करने की बात कही गई है।

वहीं विपक्षी पार्टियों का कहना है भारत एक धर्म-निरपेक्ष देश है इसलिए यहां किसी को धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती।

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