देश

01 Feb 2019

'अंतरिक्ष परी' कल्पना चावला की पुण्यतिथि पर जाने उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें

1 फरवरी, 2003 का दिन कोई भारतीय नहीं भूल सकता है। यह वही दिन था, जब भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला अपने साथियों के साथ अंतरिक्ष से धरती पर लौट रही थीं।

हर कोई उसी अंतरिक्ष यान की तरफ़ देख रहा था, जिससे कल्पना लौट रही थीं, तभी भयानक हादसा हुआ और कल्पना और उनके साथियों की जान चली गई।

आइए जानते हैं कल्पना और उस हादसे से जुड़ी कुछ ख़ास बातें।

घटना

केवल 16 मिनट में धरती पर पहुँचने वाला था यान

प्राप्त जानकारी के अनुसार कल्पना का अंतरिक्ष यान कोलंबिया शटल STS-107 धरती से लगभग दो लाख फ़ीट की ऊँचाई पर था।

यान को धरती पर पहुँचने में केवल 16 मिनट का समय लगने वाला था, लेकिन उससे पहले अचानक ही अंतरिक्ष यान से नासा का सम्पर्क टूट गया।

किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हुआ। कुछ ही देर बाद यान का मलबा अमेरिका के टेक्सस राज्य के डैलस इलाक़े में चारों तरफ़ फैल गया।

जीवनी

हरियाणा के करनाल में हुआ था कल्पना का जन्म

कल्पना का जन्म 17 मार्च, 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना, पिता बनारसी लाल चावला और माँ संज्योति चावला की लाडली थीं।

कल्पना ने अपनी शुरुआती पढ़ाई टैगोर बाल निकेतन से की उसके बाद चंडीगढ़ से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

आगे की पढ़ाई के लिए कल्पना अमेरिका के टेक्सस चली गईं। वहीं कल्पना को अपने फ़्लाइंग इन्स्ट्रक्टर जीन पियरे हैरिसन से प्रेम हो गया और 1983 में दोनों ने शादी कर ली।

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उपलब्धि

पहली यात्रा में कल्पना ने अंतरिक्ष में बिताए थे 372 घंटे

पहली यात्रा में कल्पना ने अंतरिक्ष में बिताए थे 372 घंटे

कल्पना को मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर टीम में शामिल किया गया और उन्हें 1997 में पहली अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुना गया।

पहली यात्रा के दौरान कल्पना ने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए थे। कल्पना की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा 16 जनवरी, 2003 से शुरू हुई थी और 1 फ़रवरी को धरती पर आते समय यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

उस हादसे में कल्पना के साथ छह अन्य लोगों की जान चली गई थी।

प्रेरणा

मैं अंतरिक्ष की लिए बनी हूँ और इसी के लिए मरूँगी: कल्पना

कल्पना की मौत के बाद भारत के साथ-साथ अमेरिका के लोग भी काफ़ी दुखी हुए।

मौत के बाद कल्पना की बात, 'मैं अंतरिक्ष की लिए बनी हूँ और इसी के लिए मरूँगी' लोगों को याद आई।

आज भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना भले ही हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन वो अपने काम की वजह से हमेशा याद की जाएँगी। उनकी कुछ बातें युवाओं को आज भी प्रेरित करती हैं।

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