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मनोरंजन
14 Mar 2019

'ब्लैक टाइगर' नाम से मशहूर भारतीय जासूस रविंद्र कौशिक की बनेगी बायोपिक फिल्म

पूर्व रॉ एजेंट रविंद्र कौशिक की बायोपिक पर काम शुरू

आपको पिछले साल आई फिल्म 'राजी' याद है ना! फिल्म में आलिया भट्ट ने भारतीय जासूस का किरदार निभाया था। इसी तर्ज पर एक और फिल्म बनने जा रही है।

फिल्ममेकर राज कुमार गुप्ता, भारतीय जासूस रविंद्र कौशिक की जिंदगी पर आधारित फिल्म बनाने जा रहे हैं।

रविंद्र को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा उनकी बहादुरी और देश के लिए बहुमूल्य योगदान के लिए 'ब्लैक टाइगर' का टाइटल दिया गया था।

प्रसंग

पूर्व रॉ एजेंट रविंद्र कौशिक की बायोपिक पर काम शुरू

प्री प्रोडेक्शन

फिल्म की स्क्रिप्टिंग का काम शुरू

राज कुमार ने बताया, "फिलहाल हम इस बायोपिक फिल्म की स्क्रिप्टिंग कर रहे हैं।"

राज कुमार का कहना है कि यह एक भावनात्मक और उल्लेखनीय कहानी है।

उन्होंने कहा, "मैं रविंद्र के परिवार का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और फिल्म बनाने की अनुमति दी।"

बता दें कि राज कुमार इससे पहले 'नो वन किल्ड जेसिका', 'रेड' और 'आमिर' जैसी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं।

कहानी

रविंद्र की बहन का कहना, राज कुमार समझदार फिल्ममेकर

रविंद्र की बहन शशि वशिष्ठ का कहना है, "भाई की कहानी पर फिल्म बनाने के लिए हमसे कई लोग मिले, लेकिन हमें कभी कोई सही नहीं लगा, क्योंकि यह हमारे लिए काफी व्यक्तिगत है।"

उन्होंने आगे कहा, "जब राज कुमार ने इस पर बात की तो उनके काम को देखकर हम आश्वस्त हो गए। हमने उनकी फिल्म 'नो वन किल्ड जेसिका' देखी है। वह समझदार फिल्ममेकर हैं, ऐसे में भाई की जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए वह सही हैं।"

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नोटिफाई करें

रविंद्र में बचपन से ही देश के लिए कुछ करने की थी ललक

शशि ने कहा, "उनके भाई में देश के लिए कुछ कर गुजरने की ललक बचपन से थी। वह बचपन से ही देशभक्ति पर प्ले लिखते थे।" रविंद्र की बहन ने बताया कि उनके भाई को लोग विनोद खन्ना के नाम से भी बुलाते थे।

खुफिया

थियेटर के कलाकार भी थे रॉ एजेंट रविंद्र

बता दें कि रविंद्र एक ऐसे एजेंट थे जो पाकिस्तान में अंडरकवर रहे थे। रविंद्र, रॉ ज्वाइन करने से पहले थियेटर में अभिनय करते थे।

पाकिस्तानी सेना में प्रवेश पाने के बाद, रविंद्र ने रॉ को बहुमूल्य जानकारियां दी थीं।

हालांकि, एक मिशन को पूरा करते हुए रविंद्र को पाकिस्तानी सेना द्वारा पकड़ लिया गया था, जिसके बाद उन्हें 16 सालों तक मियांवली जेल में बंद रखा गया।

साल 1999 में रविंद्र का निधन जेल में ही हो गया था।

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