सोने के गहनों को लेकर बदलने वाले हैं नियम, जानें

बिज़नेस

05 Oct 2019

सोने के गहनों को लेकर बदलने वाले हैं नियम, सरकार ने दी मंज़ूरी

दिवाली नज़दीक है और इस समय देश में सबसे ज़्यादा गहनों की ख़रीदारी की जाती है।

अगर आप भी इस दिवाली सोने के गहनों को ख़रीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह ख़बर आपके लिए ही है।

बता दें कि सरकार ने सोने के गहनों की ख़रीद के नियमों को बदलने की पूरी तैयारी कर ली है। इसका गहनों के उद्योग पर बहुत बड़ा असर पड़ने वाला है, हालाँकि इससे ग्राहकों को फ़ायदा होगा।

आइए जानें।

हॉलमार्किंग

हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी

हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी

उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि वाणिज्य मंत्रालय ने सोने के गहनों के लिए BIS हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है।

हालाँकि, विश्व व्यापार संगठन (WTO) को सूचना देकर ही इसे लागू किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि वाणिज्य विभाग ने एक अक्टूबर को इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है, लेकिन अभी WTO के संदर्भ में कुछ समस्या है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

प्रक्रिया पूरी होने में लग सकता है दो महीने का समय

WTO की तरफ़ से तय किए गये नियमों के तहत, इस मामले में सबसे पहले उसको सूचित करना होगा। इस प्रक्रिया में लगभग दो महीने का समय लग सकता है। इसके बाद ही नया नियम लागू किया जाएगा।

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जानकारी

हॉलमार्किंग का मतलब है सोने की शुद्धता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में देशभर में लगभग 800 हॉलमार्किंग केंद्र मौजूद हैं और केवल 40% आभूषणों की ही हॉलमार्किंग की जाती है। हॉलमार्किंग का मतलब सोने की शुद्धता का प्रमाण है।

भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक देश है, जो मुख्य रूप से आभूषण उद्योग की माँग को पूरा करता है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत हर साल 700-800 टन सोना अन्य देशों से आयात करता है।

BIS के पास है हॉलमार्किंग के प्रशासनिक अधिकार

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के पास हॉलमार्किंग के लिए प्रशासनिक अधिकार है। इसने तीन ग्रेड: 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट के सोने के लिए हॉलमार्किंग के मानक तय किए गए हैं।

नियम

अभी तक देश में हॉलमार्किंग करना है स्वैच्छिक

अभी तक देश में हॉलमार्किंग करना है स्वैच्छिक

अभी तक देश में सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग करना स्वैच्छिक है। हालाँकि, इस नियम के लागू होने के बाद सोने के गहनों को बेचने से पहले हॉलमार्किंग लेना अनिवार्य हो जाएगा।

देश में सोने के गहनों की गुणवत्ता को लेकर कोई कसावट नहीं है। इसलिए, दुकानदार अनजान ग्राहकों को कई बार 22 कैरेट की जगह 21 कैरेट या गुणवत्ता मानकों से कम कैरेट का सोना बेच देते हैं, जबकि कीमत उनसे अच्छी गुणवत्ता वाले सोने का लिया जाता है।

कार्यवाई

कम गुणवत्ता वाला सोना बेचने पर जारी किया जाएगा नोटिस

हॉलमार्किंग का नियम अनिवार्य हो जाने के बाद अगर कोई दुकानदार ग्राहकों को कम गुणवत्ता वाला सोना बेचता है, तो उसे पहले चरण में नोटिस जारी किया जाएगा।

मौजूदा नियमों में हॉलमार्किंग केंद्र खोलने के लिए स्वर्णकारों को 10,000 रुपये शुल्क देना होता है। यह केंद्र हर आभूषण पर हॉलमार्किंग करवाने का 35 रुपये शुल्क लेता है।

बता दें कि हॉलमार्किंग से गहनों में कितना सोना और कितना अन्य धातु लगा है, उसके अनुपात का सटीक निर्धारण हो पाएगा।

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