मोबिलिटी स्टार्ट-अप युलु के को-फाउंडर से खास बातचीत

एक्सक्लूसिव

12 May 2019

#NewsBytesExclusive: अर्बन मोबिलिटी को नई दिशा से दे रहा है बेंगलुरू का स्टार्ट-अप युलु

अगर आप बेंगलुरू में उबर ऐप ओपन करेंगे तो आपको ई-बाइक का ऑप्शन दिखेगा।

यहां ई-बाइक सेवा की शुरुआत युलु (YULU) ने की है। युलु एक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्ट-अप है, जिसके साथ उबर ने स्वच्छ परिवहन के लिए साझेदारी की है।

न्यूजबाइट्स ने हाल ही में युलु के को-फाउंडर अमित गुप्ता से बात की थी।

आइये, जानते हैं उन्होंने अपने सफर, मिशन और भविष्य की योजनाओं को लेकर क्या कहा।

चार लोगों ने शुरु की थी कंपनी

अमित गुप्ता, आरके मिश्रा, हेमंत गुप्ता और नवीन दाचुरी ने 2017 में इस सेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने सबसे पहले साइकिल शेयरिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 'मिराकल' ई-बाइक जोड़ी। फिलहाल यह सर्विस बेंगलुरू, पुणे, नवी मुंबई और भुवनेश्वर में उपलब्ध है।

शुुरुआत की वजह

ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की वजह से हुई शुरुआत

अमित ने कहा कि उन्होंने ट्रैफिक की समस्या और हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए युलु की शुरुआत की थी।

उन्होंने कहा, "हमारा मानना था कि लोगों का अपनी कार इस्तेमाल करना या किसी के साथ टैक्सी शेयर करना सड़कों का सदुपयोग नहीं है।"

इस वजह से उन्होंने छोटा दोपहिया वाहन ऑफर करना शुरू किया जिससे लोग एक-दूसरी जगह आ-जा सके।

युलु का उद्देश्य एक ऐसा समाधान उपलब्ध कराना था, जिससे लोग अपना निजी वाहन इस्तेमाल करना बंद कर सके।

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नोटिफाई करें

युलु के पास है 8000 साइकिल और 500 ई-बाइक

इस वजह से उन्होंने मैनुअली ऑपरेटेड 'मूव' साइकिल और 'मिराकल' ई-बाइक की शुरुआत की। अभी युलु के पास लगभग 8,000 साइकिल और 500 ई-बाइक है। अमित ने कहा कि उनकी योजना मैनुुअल और इलेक्ट्रिक वाहन शामिल कराना था।

तरीका

ऐसे मिलती है युलु की साइकिल और ई-बाइक

युलु की बुकिंग बहुत आसान है। यह उबर पर किसी कैब को बुक करने जैसा है, लेकिन जहां कैब आपकी लोकेशन पर चलकर आती है, लेकिन युलु की साइकिल और ई-बाइक के लिए आपको चलकर उनके पास जाना होगा।

जब आप राइड के लिए युलु/उबर ऐप इस्तेमाल करते हैं तो इसमें सबसे नजदीकी युलु जोन, आईटी पार्क आदि दिखेंगे, जहां आपको साइकिल या ई-बाइक मिल सकती है।

इसके बाद आपको इसे अनलॉक करना होगा और आपकी राइड शुरू हो जाएगी।

नजदीकी युलु स्टेशन पर छोड़नी होगी साइकिल

अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचने के बाद आपको नजदीकी युलु जोन पर ड्रॉप करना होगा। अगर आपके पास युलु जोन नहीं है तो आप इसे पॉज करके छोड़ सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको हर 10 मिनट के लिए 5 रुपये का चार्ज देना होगा।

डिजाइन

भारतीय सड़कों के लिहाज से डिजाइन की गई है बाइक

युलु का बिजनेस कई अमेरिकी स्टार्ट-अप्स से मिलता है लेकिन इसके इलेक्ट्रिक व्हीकल का डिजाइन पूरी तरह अलग है।

अमित ने कहा कि यह भारतीय संस्कृति का असर है। किक स्कूटर पर राइड करते समय जहां राइडर को खड़ा होना होता है, लेकिन भारतीय लोग खड़े होकर सफर करना पसंद नहीं करते।

साथ ही उन व्हीकल के छोटे साइज भारतीय सड़कों के हिसाब से उपयुक्त नहीं होते।

सुविधा

हेलमेट और ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत नहीं

अमित ने कहा, "हमारे पास सामान्य स्कूटर का ऑप्शन था, लेकिन हमें लगता है कि ये कम दूरी का सफर करने वाले लोगों के लिए ये ओवर डिजाइन है।"

इसके बाद उन्होंने 43 किलोग्राम वजन का सिंगर-सीटर स्कूटर डिजाइन किया।

यह स्कूटर आयरन फ्रेम पर बनाया गया और इसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

इसकी अधिकतम स्पीड 25 किलोमीटर है, जिस वजह से राइडर के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, हेलमेट और स्कूटर पर नंबर प्लेट की जरूरत नहीं होती।

सिंगल चार्ज पर 60 किलोमीटर चलती है बाइक

अमित ने कहा कि एक बार चार्ज होने के बाद यह 60 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं। यहां पर राइडर औसतन 5 किलोमीटर की राइड करते हैं। अगर बाइक की बैटरी डिस्चार्ज होती है तो यह अनलॉक नहीं होगी।

नियम

16 साल से अधिक उम्र के लोग कर सकते हैं ड्राइव

कानूनी तौर पर कोई भी व्यक्ति युलु बाइक चला सकता है, लेकिन नियम और शर्तों के हिसाब से राइडर की उम्र 16 साल होनी चाहिए।

हालांकि इसके बावजूद कई लोग ऐप में गलत उम्र डालकर इसे बुक कर लेते हैं।

अमित ने कहा कि इसे रोकना तकनीकी तौर पर संभव नहीं है। इसके बावजूद कंपनी ऐप पर वार्निंग मैसेज दिखाती है और बाइक पर इसे लेकर स्टीकर भी लगा हुआ है।

नियम नहीं मानने वालों पर 1,000 रुपये जुर्माना है।

दिल्ली में सर्विस शुरू करने की योजना

युलु अब बेंगलुरू में विस्तार के साथ-साथ दिल्ली और दूसरे शहरों में सेवा शुरू करने का विचार बना रही है। इसके लिए कंपनी कई एजेंसियों के साथ संपर्क में है।

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