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बिज़नेस
08 Feb 2019

अगर गाड़ी हो जाए चोरी तो यह प्रक्रिया पूरी कर पाएं क्लेम

गाड़ी चोरी होने की स्थिति में कैसे लें क्लेम?

लोग अपनी मेहनत की कमाई से बाइक और कार खरीदते हैं। कुछ लोग गाड़ी खरीदने के लिए अपनी दूसरी जरूरतों को अधूरा छोड़ देते हैं।

ऐसे में अगर खरीदी हुई गाड़ी चोरी हो जाए तो उसका बहुत दुख होता है।

हालांकि, इस स्थिति में कुछ जरूरी कदम उठाकर इस नुकसान की भरपाई की जा सकती है।

आज हम आपको वह प्रक्रिया बताने जा रहे हैं जिसके सहारे चोरी हुए वाहन का क्लेम प्राप्त किया जा सकता है।

प्रसंग

गाड़ी चोरी होने की स्थिति में कैसे लें क्लेम?

जरूरत

क्लेम पाने के लिए गाड़ी का इंश्योरेंस होना जरूरी

अगर आपकी गाड़ी चोरी हो गई है और आप इसका क्लेम पाना चाहते हैं तो इसके लिए चोरी हुई गाड़ी का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होना जरूरी है।

अगर चोरी हुई गाड़ी का इंश्योरेंस हैं तो आपको क्लेम करने के लिए गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), इंश्योरेंस की कॉपी और ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत पड़ेगी। इन्हीं डॉक्युमेंट के आधार पर क्लेम करने के प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए इन डॉक्युमेंट को संभालकर रखें।

सबसे पहले दर्ज कराएं FIR

FIR

सबसे पहले दर्ज कराएं FIR

अगर आपकी गाड़ी चोरी हुई तो इसकी सूचना पुलिस को दें।

पुलिस को चोरी की शिकायत के साथ गाड़ी का RC और इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी भी जमा करवा दें।

पुलिस इस शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करेगी। यह FIR इस बात का सबूत होगी कि आपकी गाड़ी चोरी हो गई है।

इसके आधार पर आप क्लेम की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं।

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नोटिफाई करें

क्लेम की प्रक्रिया

इंश्योरेंस कंपनी नियुक्त करती है सर्वेयर

पुलिस में FIR दर्ज कराने के बाद इंश्योरेंस कंपनी को अपनी कार या बाइक चोरी होने की सूचना देनी होती है।

क्लेम की प्रक्रिया शुरू करने के लिए क्‍लेम फॉर्म, RC बुक की कॉपी, इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी की कॉपी और FIR की कॉपी इन्‍श्‍योरेंस कंपनी को देनी होगी।

शिकायत मिलने के बाद कंपनी क्लेम की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए एक सर्वेयर निुयक्त करेगी जो इस पूरे मामले को देखेगा और कंपनी को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

क्लेम की प्रक्रिया

RTO कार्यालय में देने होंगे ये डॉक्युमेंट

पुलिस और इंश्योरेंस कंपनी में इसकी शिकायत देने के बाद स्थानीय RTO कार्यालय में भी एक पत्र देना होता है।

इस पत्र के साथ RC, गुम हुए वाहन की फोटो और इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी आदि जमा करनी होती है।

आमतौर पर इंश्योरेंस कंपनियां RTO कार्यालय में होने वाली प्रक्रिया में सहायता करती है।

अगर पुलिस 90 दिन में गाड़ी नहीं खोज पाती है तो वो नो ट्रेस रिपोर्ट जारी करेगी, जिसे इंश्योरेंस कंपनी को जमा करानी होगी।

सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर मिलेगा क्लेम

सर्वेयर चोरी हुई गाड़ी की रिपोर्ट अपनी कंपनी में देता है। रिपोर्ट मिलने के बाद कंपनी बाइक या गाड़ी की एश्योर्ड पेमेंट देगी। यानी कंपनी चोरी होने के वक्त जो गाड़ी या बाइक की कीमत होगी, उसके आधार पर आपको क्लेम का भुगतान कर देगी।

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