हिंद महासागर की सतह 100 मीटर धंसने का खुला रहस्य
हिंद महासागर में एक अजीब जगह है, जहां गुरुत्वाकर्षण इतना कमजोर है कि समुद्र की सतह अपनी सामान्य स्थिति से 100 मीटर से भी ज्यादा नीचे धंस जाती है।
सालों तक किसी को अंदाजा नहीं था कि ऐसा क्यों हो रहा है। दशकों पहले सैटेलाइट्स ने जब इसे खोजा तो यह वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी पहेली बनी हुई थी। अब एक नई रिसर्च में संभवतः इस रहस्य का कारण सामने आया है।
अफ्रीका के नीचे से उठ रहा मेंटल पदार्थ
रिसर्च से पता चला है कि हिंद महासागर में गुरुत्वाकर्षण की इस कमी के पीछे पृथ्वी के मेंटल की गहराई से उठने वाला गर्म और हल्का पदार्थ है, जिसे 'जियोइड लो' कहते हैं।
दरअसल, यह पदार्थ टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने की वजह से अफ्रीका के नीचे से पूर्व की ओर आता है। लाखों सालों में इस प्रक्रिया ने वहां एक ऐसा इलाका बना दिया, जहां द्रव्यमान कम है।
इसी वजह से उस इलाके में गुरुत्वाकर्षण कमजोर पड़ गया और समुद्र की सतह भी नीचे चली गई।
10 करोड़ साल से ज्यादा के सिमुलेशन चलाए
वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर पर पृथ्वी के अंदरूनी हिस्सों के 10 करोड़ साल से ज्यादा के सिमुलेशन चलाए।
इस दौरान उन्हें पता चला कि पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से में कुछ खास स्थितियां ही इस अजीब जगह के बनने का कारण हो सकती हैं। इन नतीजों ने इस लंबे समय से चली आ रही पहेली का एक संभावित स्पष्टीकरण दिया है।