कैंसर मरीजों पर दोहरी मार, जीवनरक्षक दवाओं की आई कमी
फिलहाल भारत में बहुत से कैंसर मरीज दो बेहद जरूरी कीमोथेरेपी दवाइयों: सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लेटिन की कमी का सामना कर रहे हैं। ये दवाइयां फेफड़े, अंडाशय और पित्त की थैली के कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में बेहद अहम हैं, लेकिन अब इन्हें ढुंढना मुश्किल हो गया है। दरअसल इसकी वजह ये है कि दुनिया भर में प्लैटिनम के दाम काफी बढ़ गए हैं और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से आयात भी घट गया है। कई मरीज, खासकर वे जो सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं, अब एक मेडिकल स्टोर से दूसरे मेडिकल स्टोर तक भटक रहे हैं।
कीमतों की सीमा के बीच निर्माता उत्पादन रोक रहे
भारत में लगभग 4 में से एक कीमोथेरेपी मरीज को इन खास दवाओं की जरूरत होती है। हाल ही में प्लैटिनम के दाम दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गए हैं। ऐसे में सरकार द्वारा तय की गई कीमतों पर कंपनियों के लिए दवाएं बनाना मुश्किल हो गया है। कुछ कंपनियों ने तो इनका उत्पादन रोक दिया है, जबकि कुछ नए कॉन्ट्रैक्ट लेने से भी बच रही हैं। अगर इन दवाओं की कीमतों से जुड़े नियमों में बदलाव नहीं होता है, तो यह कमी लंबे समय तक बनी रह सकती है। इससे उन कैंसर मरीजों का इलाज और भी कठिन हो जाएगा, जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।