इलाहाबाद हाई कोर्ट का गुजारा भत्ते पर अहम आदेश, कहा- 31 लाख कमाने वाली डॉक्टर नहीं है हकदार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक स्त्री रोग विशेषज्ञ पत्नी की अंतरिम गुजारा भत्ता की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई आर्थिक रूप से सक्षम है, तो वह अपनी पैसों की जिम्मेदारी पति पर नहीं डाल सकता। पति और पत्नी दोनों प्रयागराज के डॉक्टर हैं। पारिवारिक न्यायालय ने बच्चों के लिए हर महीने 60,000 रुपये देने का आदेश पहले ही दिया था, लेकिन पत्नी के निजी गुजारा भत्ता के दावे को खारिज कर दिया था।
पत्नी की सालाना कमाई 31 लाख रुपये से अधिक
कोर्ट ने यह भी बताया कि नौकरी जाने से पहले पत्नी की सालाना कमाई 31 लाख रुपये से ज्यादा थी और वह खुद अपना खर्चा चलाने में पूरी तरह सक्षम है। कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के फैसले से अपनी सहमति जताई। कोर्ट के अनुसार, यदि कोई काम करने में सक्षम है, पर काम न करने का विकल्प चुनता है, तो वह अपने साथी से आर्थिक मदद की उम्मीद नहीं कर सकता। पति बच्चों के लिए लगातार गुजारा भत्ता दे रहा है और कोर्ट ने महसूस किया कि इस मामले में इतना ही काफी है।