CBSE की 3 भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं पूर्व मंत्री, जानिए क्या दिया तर्क
महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री और शिक्षाविद डॉ फौजिया खान ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई 3 भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा करने की अपील की है। यह नीति जुलाई 2026 से 9वीं कक्षा के छात्रों पर लागू होगी। इस नियम के तहत छात्रों को कम से कम 2 भारतीय भाषाएं पढ़नी जरूरी होंगी, लेकिन खान को लगता है कि यह ठीक नहीं है और यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की असली मंशा से मेल नहीं खाती।
CBSE ने किया अपनी नीति का बचाव
खान की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर दक्षिणी राज्यों में हिंदी और उत्तरी राज्यों में संस्कृत को अनिवार्य किया गया, तो इससे स्थानीय भाषाओं और वहां की संस्कृतियों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्हें आशंका है कि इस फैसले से देश की भाषाई विविधता कम हो सकती है। दूसरी तरफ, CBSE का कहना है कि यह नीति कई भाषाओं को सीखने को बढ़ावा देती है और स्कूलों को विदेशी भाषाओं को भी एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर रखने की छूट देती है।