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कौन है NCERT के तीन लेखक, जिन्होंने 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' अध्याय लिखकर तूफान खड़ा किया?
NCERT के विवादित अध्याय को लिखने वाले तीनों लेखकों को सुप्रीम कोर्ट ने काली सूची में डाला

कौन है NCERT के तीन लेखक, जिन्होंने 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' अध्याय लिखकर तूफान खड़ा किया?

लेखन गजेंद्र
Mar 11, 2026
05:20 pm

क्या है खबर?

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी कक्षा 8 की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' संबंधी अध्याय के लिए माफी मांग ली है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने बुधवार को निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें विवादित अध्याय लिखने वाले तीनों लेखकों मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर, आलोक प्रसन्ना कुमार से कोई संंबंध न रखें। कौन हैं ये लेखक? आइए जानते हैं।

पहचान

प्रोफेसर मिशेल फ्रांस में जन्में, लेकिन भारत में रहे

डैनिनो 1956 में फ्रांस में जन्में हैं। उनका परिवार मोरक्को से था। डैनिनो 21 साल की उम्र में भारत आ गए और तब से यही हैं। वे तमिलनाडु के ऑरोविल में रहे हैं।

वे IIT-गांधीनगर में अतिथि प्रोफेसर रहे। आर्कियोलॉजिकल विज्ञान केंद्रर स्थापित करने में मदद की। वे भारतीय सभ्यता और प्राचीन इतिहास के विशेषज्ञ हैं।

भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) के सदस्य रह चुके हैं। उनको 2017 में पद्मश्री मिला। NCERT में सामाजिक विज्ञान करिकुलम कमिटी के चेयरपर्सन हैं।

पहचान

सुपर्णा दिवाकर कौन हैं?

सुपर्णा दिवाकर को 30 से अधिक साल का ग्रामीण विकास, पुनर्जनन नेतृत्व और शिक्षा नीति में अनुभव है। उन्होंने एक प्रमुख NGO के साथ शुरुआत की थी।

वह भारतीय विकास प्रबंधन स्कूल (ISDM) की सह-संस्थापक हैं। कर्नाटक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 टास्क फोर्स में काम किया।

वह NCERT की राष्ट्रीय पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) समिति की मुख्य सलाहकार रहीं हैं।

उन्होंने कई स्कूल और टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम डिजाइन किए है और NCERT में डैनिनो की टीम में सदस्य हैं।

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पहचान

कौन हैं आलोक प्रसन्ना कुमार?

प्रसन्ना एक वकील और नीति विशेषज्ञ हैं। उन्होंने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ से कानून की पढ़ाई की है और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से सिविल लॉ किया है।

वे विधि केंद्र कानूनी नीति के सह-संस्थापक और सीनियर रेसिडेंट फेलो रहे हैं। वे सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं।

वे डैनिनो की टीम में कानूनी विशेषज्ञ के रूप में शामिल बताए जाते हैं। अध्याय में न्यायपालिका से जुड़े हिस्से उनके योगदान से थे।

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फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अध्याय लेखन के लिए टीम गठित करने को कहा

NCERT ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने संशोधित अध्याय तैयार कर लिया है, जिस पर पीठ ने नाराजगी जताई।

पीठ ने बुधवार को आदेश दिया कि संशोधित अध्याय को तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा जब तक कि इसकी समीक्षा संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा नहीं कर ली जाती।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया जिसमें एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और एक प्रतिष्ठित वकील शामिल होंगे।

फैसला

तीनों लेखकों के बारे में कोर्ट ने क्या कहा?

NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कोर्ट को सूचित किया कि डैनिनो विवादित अध्याय का मसौदा तैयार करने में शामिल थे। दिवाकर-प्रसन्ना ने उनकी सहायता की थी।

इस पर कोर्ट ने कहा कि यह संदेह करने का कोई कारण नहीं कि डैनिनो, दिवाकर और प्रसन्ना को भारतीय न्यायपालिका के बारे में उचित ज्ञान नहीं या उन्होंने छात्रों में जानबूझकर न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश की।

कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और संस्थानों को तीनों की सेवा न लेने को कहा।

विवाद

क्या है विवाद?

NCERT ने कक्षा 8 की नई पाठ्यपुस्तक में 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' नामक अध्याय के अंतर्गत 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' पर एक खंड रखा है।

अध्याय में न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली "चुनौतियों" को बताया गया है।

इसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' और 'न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और खराब बुनियादी ढांचे जैसे कई कारणों से मामलों का भारी लंबित होना' को शामिल किया गया है।

इसी का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।

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