भीषण गर्मी से भारत के करीब 3,700 अरब रुपये के कपड़ा उद्योग पर छाया संकट
भारत में पड़ रही भीषण गर्मी ने कपड़ा उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की एक नई रिपोर्ट बताती है कि यूनीक्लो, टेस्को और मार्क्स एंड स्पेंसर जैसे बड़े ब्रांड को कपड़े आपूर्ति करने वाली फैक्ट्रियों की उत्पादकता में 10 फीसदी तक की कमी आई है।
इन बाधाओं के चलते भारत के 39 अरब डॉलर (करीब 3,700 अरब रुपये) के कपड़ा निर्यात उद्योग पर गंभीर दबाव बन गया है। यह उद्योग लगभग 4.5 करोड़ श्रमिकों को रोजगार देता है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं।
45 डिग्री से ऊपर पहुंचा तापमान
इस साल तापमान 45 डिग्री से ऊपर चला गया है। उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में तो 48.2 डिग्री तक पहुंच गया था। इसका सीधा असर फैक्ट्रियों के कामकाज पर पड़ा है।
श्रमिकों के बीमार होने की वजह से छुट्टी पर जाने वालों की संख्या बढ़ गई है, सामान भेजने में देरी हो रही है और कपड़ों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
हैरान करने वाली बात यह है कि दुनियाभर के केवल एक तिहाई खरीदार ही फैक्ट्रियों से तापमान की निगरानी करने को कहते हैं, जिससे कई खतरे अनदेखे रह जाते हैं।
जानकारों का मानना है कि अगर, जल्द ही फैक्ट्रियों में बेहतर कूलिंग व्यवस्था और गर्मी से बचाव के कड़े नियम नहीं बने तो भारत को अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन श्रमिकों को भुगतना पड़ेगा, जो बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के बीच काम करने के लिए मजबूर हैं।